ईरान-समर्थित हूतियों का बढ़ता दबाव: सऊदी अरब पर ड्रोन-मिसाइल हमले, अमेरिका के सामने भी नई चुनौती
नई दिल्ली | 18 सितंबर 2026: मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच यमन के ईरान-समर्थित हूती संगठन और सऊदी अरब के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया है। हाल के दिनों में हूतियों ने सऊदी अरब के कई इलाकों और महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इसके जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले बलों ने यमन में हूती ठिकानों पर हमले किए हैं।
इस घटनाक्रम ने अमेरिका के सामने भी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। अमेरिका पहले से ही ईरान के साथ लंबे सैन्य संघर्ष में उलझा हुआ है और इसी दौरान यमन में हूतियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियां Red Sea और Bab el-Mandeb जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के लिए चिंता बढ़ा रही हैं।
सऊदी अरब पर हूतियों के लगातार हमले
रिपोर्टों के अनुसार हूतियों ने पिछले दिनों सऊदी अरब के कई शहरों और सैन्य ठिकानों की ओर ड्रोन और मिसाइलें लॉन्च कीं। सऊदी अधिकारियों ने कई हमलों को अपने एयर-डिफेंस सिस्टम से रोकने की जानकारी दी है।
17 सितंबर को सऊदी अधिकारियों के अनुसार एक इंटरसेप्ट किए गए हूती ड्रोन का मलबा ताइफ क्षेत्र में गिरा, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और दो लोगों के घायल होने की खबर है। हूती पक्ष ने सऊदी दावों को खारिज किया है।
सऊदी की तेल व्यवस्था पर भी असर
इस संघर्ष का सबसे महत्वपूर्ण असर ऊर्जा क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है।
एक हमले के बाद सऊदी अरब की East-West तेल पाइपलाइन की संचालन क्षमता प्रभावित हुई और Red Sea के Yanbu तेल निर्यात केंद्र पर भी असर पड़ा। इससे सऊदी अरब की तेल आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा।
हालांकि 18 सितंबर को Reuters ने रिपोर्ट किया कि Saudi Aramco Gulf से तेल निर्यात बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है और इससे आपूर्ति संबंधी कुछ चिंताएं कम हुई हैं। उसी दिन Brent crude की कीमत लगभग 2% गिरकर करीब $102.53 प्रति बैरल रही।
Bab el-Mandeb क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
यमन के पास स्थित Bab el-Mandeb Strait Red Sea और Gulf of Aden को जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
Reuters के अनुसार हालिया हूती सैन्य बढ़त ने इस क्षेत्र में संगठन की स्थिति को काफी मजबूत किया है। इससे अंतरराष्ट्रीय shipping और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
अगर इस समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है, तो जहाजों को वैकल्पिक लंबे रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है, जिससे परिवहन लागत और यात्रा का समय बढ़ सकता है।
अमेरिका के लिए क्यों बढ़ी चुनौती?
अमेरिका पहले से ही ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है। इसी दौरान सऊदी अरब को हूती हमलों से निपटने के लिए अतिरिक्त missile-defense सहायता की जरूरत पड़ रही है।
AP की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब ने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र सहित कई देशों से सैन्य सहायता मांगी है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिका अप्रत्यक्ष सहयोग और intelligence assistance दे रहा है, लेकिन हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बच रहा है।
ईरान की भूमिका पर नजर
हूतियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है और मौजूदा संघर्ष में उनकी सैन्य गतिविधियों को व्यापक ईरान-अमेरिका टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
Reuters के अनुसार हूतियों की हालिया बढ़त ने ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव और Red Sea तथा Persian Gulf के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
हालांकि हूती संगठन अपनी स्वतंत्र राजनीतिक और सैन्य पहचान रखता है, इसलिए उसके हर कदम को सीधे ईरान के आदेश के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
अमेरिका और हूतियों के बीच बातचीत भी
दिलचस्प बात यह है कि सैन्य तनाव के बावजूद अमेरिका और हूती प्रतिनिधियों के बीच ओमान में बातचीत की खबर भी सामने आई है।
इससे संकेत मिलता है कि सैन्य दबाव के साथ-साथ कूटनीतिक रास्ते भी तलाशे जा रहे हैं। हालांकि क्षेत्रीय संघर्ष का भविष्य अभी स्पष्ट नहीं है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल तीन मुद्दों पर पूरी दुनिया की नजर है-
पहला, क्या सऊदी अरब अपने तेल और समुद्री ढांचे को लगातार हो रहे हमलों से सुरक्षित रख पाएगा?
दूसरा, क्या हूती Red Sea और Bab el-Mandeb क्षेत्र में अपनी सैन्य स्थिति को और मजबूत करेंगे?
तीसरा, क्या अमेरिका सीधे सैन्य कार्रवाई करेगा या कूटनीतिक समाधान की कोशिश जारी रखेगा?
मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव तेल की कीमतों, अंतरराष्ट्रीय shipping और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
Disclaimer: यह रिपोर्ट 18 सितंबर 2026 तक उपलब्ध Reuters और Associated Press की रिपोर्टों पर आधारित है। युद्ध और संघर्ष से जुड़ी परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और शुरुआती दावों की स्वतंत्र पुष्टि हमेशा संभव नहीं होती।